विशेष - कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना..

कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना..



Posted Date: 10 Jan 2019

63
View
         

नौकरी कहां है? जब देश में नौकरियों के अभाव पर लगातार सवाल उठ रहे थे तब सरकार लेकर आई शिक्षा और नौकरी में 10 प्रतिशत गरीब आरक्षण बिल। मोदी सरकार के कार्यकाल के अंतिम सत्र के, अंतिम दिन पर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा और रोज़गार में 10 प्रतिशत आरक्षण देता संविधान संशोधन बिल सदन में आया और पास भी हो गया।

सबसे पहले आप यह जान लें कि मीडिया में लिखा और दिखाया जा रहा है कि यह बिल 10 प्रतिशत ‘गरीब सवर्णों’ को आरक्षण देगा। जबकि ऐसा नहीं है, सामाजिक न्याय मंत्री विजय साम्पला ने कहा कि इस बिल से आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को आरक्षण मिलेगा। वो ब्राह्मण हो, बनिया हो, मुस्लिम हो या ईसाई, हर गरीब को आरक्षण मिलेगा।

तो क्यों मीडिया में इसे केवल सवर्णों के आरक्षण का बिल बताया जा रहा है? क्या सरकार ने मुस्लिम और ईसाईयों के आरक्षण पर अपनी राय बदल ली है? कहा जा रहा है कि ये बिल आर्थिक आधार पर है, लेकिन जब मुस्लिम आर्थिक आधार पर ही आरक्षण मांगते थे तो सरकार और आरएसएस कहती थी कि ये धर्म के नाम पर आरक्षण की मांग कर रहे हैं।

पहले एससी/एसटी एक्ट और फिर रविवार को अनुसूचित जाति के लिए खिचड़ी बनाकर ‘भीम महाभोज’ जैसे कार्यक्रम का आयोजन ये साफ दर्शाता है कि सरकार एससी/एसटी जातियों को साधने की कोशिश कर रही है। भीमा कोरेगांव और रोहित वेमुला जैसे प्रकरणों को राष्ट्रवाद से झांपने की कोशिश की गई लेकिन बात बनी नहीं। ये पहली बार था जब बीजेपी ने अनुसूचित जाति के लोगों को बुलाकर खिलाया, इससे पहले तक अमित शाह पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अनुसूचित जाति के मतदाता के घर जाकर खाना खाते थे और फोटो ट्वीट कर देते थे।

रविवार को सरकार खिचड़ी खिलाती है और मंगलवार को गरीब तबके को 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान करती है। मीडिया में विश्लेषण हुआ था कि सरकार राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का चुनाव इसलिए हार गई क्योंकि सवर्ण नाराज़ है। तो क्या सरकार ये बिल सवर्णों को साधने के लिए लेकर आई है? याद करिए पीएम मोदी के भाषण, कब उन्होंने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग को आरक्षण देने की बात प्रमुखता से कही। तो क्या राम मंदिर मोर्चे पर विफल रही सरकार नाराज़ सवर्णों को मनाने के लिए ये बिल लेकर आई है?

बीजेपी समर्थक आमतौर पर आरक्षण के खिलाफ रहे हैं। अभी तक उन्होंने ये माहौल बनाया कि बीजेपी देश से आरक्षण समाप्त कर देगी। माहौल इतना बढ़ गया था कि आरक्षण विरोधी छवि से बचने के लिए सरकार 10 प्रतिशत आरक्षण का बिल लेकर आई। अब बीजेपी समर्थकों को अपना मत और व्हाट्सएप पर फैलाए अपने मैसेजों को बदलना पड़ेगा। बीजेपी समर्थकों में अधिकतर सवर्ण हैं, जो अभी तक आरक्षण से वंचित थे। उन्होंने आरक्षण विरोधी माहौल इतनी दृढ़ता से बनाया कि मोहन भागवत, शिवराज सिंह चौहान, यहां तक कि 2016 में खुद पीएम मोदी ने पार्टी की आरक्षण विरोधी छवि को धोने की कोशिश की।

सबसे अहम बात पिछले साल तेलंगाना में केसीआर की पार्टी ने मुस्लिमों को 12 प्रतिशत आरक्षण देने का बिल पास किया। इस बिल का विरोध खुद अमित शाह ने किया और वो भी खुले मंच से झमक के। मंच से अमित शाह बोले कि, ‘चंदशेखर राव जी ने, औवेसी के दबाव में आकर धर्म के आधार पर आरक्षण देने का बिल पास किया है। मुस्लिम आरक्षण का जो बिल लाया गया है वो हमारे दलित, ओबीसी, आदिवासी भाईयों के खिलाफ है क्योंकि 50 प्रतिशत सीमा सुप्रीम कोर्ट ने तय की है, इससे ज्यादा रिज़रवेशन बढ़ नहीं सकता। अगर 12 प्रतिशत अल्पसंख्यकों को आरक्षण देना है तो किसका काटकर दोगे? दलित का, आदिवासी का, ओबीसी का? किसका काटोगे?’ नवंबर 2018 में अमित शाह ने यह बात कही थी, अब उन्हें भी अपनी बात को बदलना होगा।

न्यूज़लॉन्ड्री की एक रिपोर्ट से हमें पता चलता है कि केंद्र सरकार हर साल केवल 45000 नौकरियां पैदा कर रही है। जिसका 10 प्रतिशत मतलब सिर्फ 4500, तो क्या सिर्फ साढ़े चार हजार नौकरियों के लिए ये पूरा काम हो रहा है? अगर आरक्षण अच्छा है तो ये प्राइवेट सेक्टर में क्यों नहीं है? जबकि प्राइवेट सेक्टर में सरकार से अधिक नौकरियां हैं। प्राइवेट कॉलेजों में भी आरक्षण मिलता है तो नौकरियों में क्यों नहीं? हांलांकि रामविलास पासवान ने सरकार से प्राइवेट सेक्टर में भी 60 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की है।

सरकार द्वारा इस बिल के आने के बाद माहौल और राय बदली तो है। लोग जो मेरिट की बात करते थे, आरक्षण की खिलाफ़त करते थे, वो आज इसके पक्ष में हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमित शाह हैं और उनका 2018 में तेलंगाना में दिया भाषण। एक बात तो तय हैं अगर 10 प्रतिशत आरक्षण का ये फॉर्मुला हिट हो गया तो 2019 में सरकार के बाकी सभी कमज़ोर मुद्दे दब सकते हैं। इससे एक बात तो स्पष्ट होती है कि आरक्षण बहुत बुरा है लेकिन तब तक जब तक वो मिले नहीं।


BY : Yogesh