राजनीति - ‘अगर चुनावी चाल है तो मंहगा पड़ेगा 10 प्रतिशत आरक्षण’ : शिवसेना का ‘सामना’

‘अगर चुनावी चाल है तो मंहगा पड़ेगा 10 प्रतिशत आरक्षण’ : शिवसेना का ‘सामना’



Posted Date: 10 Jan 2019

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मुंबई। सवर्ण आरक्षण बिल को संसद में मंजूरी मिलने के बाद बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने गुरूवार को आश्चर्य जताते हुए कहा कि आरक्षण तो दे दिया लेकिन नौकरियां कहां से लाएंगे। साथ ही पार्टी ने चेतावनी भी दी कि अगर ये बिल एक चुनावी चाल है तो यह मंहगा साबित होगा।

बता दें कि बुधवार को संसद में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को रोजगार और शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण देने वाला संविधान संशोधन विधेयक बिल पास हो गया। शिवसेना ने कहा कि मराठा समुदाय को भी महाराष्ट्र में आरक्षण दिया गया है। लेकिन सवाल अभी भी यही बना हुआ है कि नौकरियां कहां है?

हांलांकि सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि इस बिल में 10 प्रतिशत आरक्षण सिर्फ गरीब सवर्णों को ही नहीं मिलेगा। बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर हर वो वर्ग जिसे पहले की व्यवस्था में आरक्षण नहीं मिल रहा है वो इस 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभार्थी होगा। वो ईसाई, बनिया, मुसलमान कोई भी गरीब हो सकता है।

शिवसेना ने अपने मुखपात्र सामना के एक संपादकीय में कहा कि, ‘जब सत्ता में बैठे लोग रोजगार और गरीबी दोनों मोर्चों पर विफल होते हैं तब वे आरक्षण का कार्ड खेलते हैं। अगर यह वोट के लिए लिया गया निर्णय है तो यह महंगा साबित होगा। 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद रोजगार का क्या होगा और नौकरी कहां से मिलेगी?’

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शिवसेना ने कहा कि भारत में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी हर महीने 13 लाख बढ़ रही है। 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिगों को नौकरी देना अपराध है लेकिन बाल श्रम लगातार जारी है। देश में रोजगार की दर को संतुलित बनाए रखने के लिए हर साल 80 से 90 लाख नए रोजगारों की जरूरत है, लेकिन यह गणित कुछ समय से असंतुलित है।

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सामना के मराठी संस्करण में नोटबंदी और जीएसटी पर हमला बोलते हुए कहा गया कि नोटबंदी एवं जीएसटी लागू किये जाने के कारण करीब 1.5 करोड़ से लेकर दो करोड़ नौकरियां गई हैं। पीएम के पकौड़े वाले बयान पर चुटकी लेते हुए सामना में लिखा है कि युवाओं को पकौड़ा तलने की सलाह देने वाले प्रधानमंत्री को आखिरकार आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देना पड़ा।


BY : Yogesh