राष्ट्रीय - केंद्र की RBI से 3.6 लाख करोड़ की डिमांड, केंद्रीय बैंक की बगावत?

केंद्र की RBI से 3.6 लाख करोड़ की डिमांड, केंद्रीय बैंक की बगावत?



Posted Date: 06 Nov 2018

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नई दिल्ली। आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच ठानी रार कहीं से कम होने का नाम नहीं ले रही है। जहां एक ओर केंद्र सरकार एनपीए का ठीकरा आरबीआई के सिर फोड़ना चाह रही है। वहीं आरबीआई गवर्नर के ऊपर दबाव बनाने की चर्चा भी खबरों का बाजार गरम कर रही है। इसी बीच यह बात भी सामने आई कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के पत्र का हवाला देकर मोदी सरकार आरबीआई एक्ट के सेक्शन सात का इतेमाल कर आरबीआई से अपनी बाते मनवाने का दावा कर सकती है। जिसमें आरबीआई को केंद्र के अधीन काम करने वाले एक संस्था बताया गया।

वहीं अब ताजा मामले में इस बात की भी सुगबुगाहट तेज हो चली है कि आरबीआई और केंद्र के बीच तनातनी का माहौल वित्त मंत्रालय द्वारा पेश किये गए एक ख़ास प्रस्ताव की वजह से पैदा हुआ।

बताया जा रहा है कि मंत्रालय द्वारा पेश किये गए प्रस्ताव में केंद्रीय बैंक के पास रखे 9.59 लाख करोड़ रुपये से 3.6 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस रकम केंद्र सरकार को ट्रांसफर करने की बात कही गई थी। यही प्रस्ताव केंद्र और आरबीआई के बीच पनपी तल्खी की मुख्य वजह बनी।

खबरों के मुताबिक़ वित्त मंत्रालय ने सुझाव दिया था कि इस सरप्लस रकम की देखरेख आरबीआई और सरकार मिलकर कर सकती है।

वित्त मंत्रालय का मानना है कि आरबीआई के भंडार से पूंजी के ट्रांसफर से जुड़ा सिस्टम और संबंधित शर्तें बैंक की आर्थिक खतरों को लेकर बेहद ‘रुढ़िवादी’ आकलन पर आधारित है।

द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से पुष्टि की है कि रिजर्व बैंक यह मानता है कि सरकार द्वारा उसके भंडार से पूंजी लेने की इस कोशिश से देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से आरबीआई ने इस प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया।

बताया जा रहा है कि मंत्रालय ने पूंजीगत जरूरतों के मद्देनजर यह भी प्रस्ताव दिया कि 2017-18 से आरबीआई को पूरा सरप्लस सरकार को ट्रांसफर कर देना चाहिए। इस मुद्दे पर भी सरकार और केंद्रीय बैंक की राय अलग-अलग है।

बता दें कि 2017-18 में आरबीआई ने सरकार को 50,000 करोड़ रुपये का सरप्लस दिया था। 2016-17 में बैंक ने 30,659 करोड़ रुपये ही सरकार को ट्रांसफर किए थे। सरकार का मानना है कि विश्व के अन्य केंद्रीय बैंकों की तुलना में आरबीआई अपने कुल एसेट्स की तुलना में ज्यादा कैपिटल अपने पास रखता है। जहां तक आरबीआई का सवाल है, केंद्रीय बैंक अपना सरप्लस मुद्रा भंडार किसी किस्म के बाजार जोखिम या किसी अन्य आर्थिक खतरे से निपटने के लिए रखता है।

वहीं वित्त मंत्रालय की बात करें तो उसकी दलील है कि सरप्लस ट्रांसफर से जुड़े वर्तमान सिस्टम को आरबीआई ने जुलाई 2017 में ‘एकतरफा’ मंजूरी दे दी, क्योंकि बोर्ड में सरकार की ओर से नामांकित दो सदस्य मीटिंग में मौजूद नहीं थे।

 

सरकार इस व्यवस्था से सहमत नहीं है इसलिए वह लगातार आरबीआई से इस मामले पर बातचीत करना चाहती है। सरकार की राय है कि कैपिटल रिजर्व को लेकर आरबीआई का अनुमान जरूरत से ज्यादा है, जिसकी वजह से उसके पास 3.6 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी है।

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सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से सरकार चाहती है कि आरबीआई से सलाह मशविरा करके इस रकम का इस्तेमाल किया जा सके।

उदाहरण के तौर पर इस रकम का इस्तेमाल पब्लिक सेक्टर बैंकों को दोबारा पूंजी देने, बैंकों को ज्यादा कर्ज देने में मदद करने आदि में किया जा सकता है।

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BY : Ankit Rastogi


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