विशेष - गोवर्धन पूजा विशेष : ये पांच महत्त्व बनाते हैं 'गोबर' को 'अमृत'

गोवर्धन पूजा विशेष : ये पांच महत्त्व बनाते हैं 'गोबर' को 'अमृत'



Posted Date: 08 Nov 2018

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नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा एक विशेष महत्व के साथ की जाती है। इस बार गोवर्धन पूजा का यह त्योहार दिवाली के एक दिन बाद 8 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस दिन गोवर्धन पर्वत को प्रतीक रूप में गोबर के माध्यम से बनाया जाता है। जिसके सम्मुख भगवान श्रीकृष्ण, इंद्रदेव, वरुणदेव, गायें, ग्वाल-बालों, राजा बलि और अग्निदेव का पूजन किया जाता है। गोबर की पूजा करते वक्त आपको गोबर के जैविक और धार्मिक महत्त्व भी पता होने चाहिए। हम आपको बताएंगे गोबर के पूजा से इतर 5 सबसे बड़े उपयोग,

1. गाय के गोबर में हैजे के कीटाणुओं को खत्म करने की ताकत होती है। क्षय रोगियों को गाय के बाड़े में रखने से गोबर और गौ-मूत्र की गंध से क्षय रोग के कीटाणु मर जाते हैं।

2. मरें पशु के एक सींग में गोबर भरकर भूमि में दबाने से कुछ समय बाद समाधि खाद मिलती है, जो कई एकड़ भूमि के लिए उपयोगी होती है।

3. प्राचीन काल में मिट्टी और गाय का गोबर शरीर पर मलकर साधु-संत नहाते थे। इसके पीछे धार्मिक मान्यता है कि गाय के गोबर में लक्ष्मी का वास माना जाता है।

4. वैज्ञानिक कहते हैं कि गाय के गोबर में विटामिन बी-12 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह रेडियोधर्मिता को भी सोख लेता है। आम मान्यता है कि गाय के गोबर के कंडे से धुआं करने पर कीटाणु, मच्छर आदि भाग जाते हैं तथा दुर्गंध का नाश होता है।

5. गाय के गोबर का चर्म रोगों के उपचार में सबसे अधिक महत्व है। प्राचीनकाल में मकानों की दीवारों और भूमि को गाय के गोबर से लीपा-पोता जाता था। गोबर दीवार और ज़ंमीन को मजबूत बनाता था।


BY : Yogesh mishra