विशेष - मतलबी हूं इसीलिए सोच रहा हूं, क्या होगा सद्दाम और सुधीर का?

मतलबी हूं इसीलिए सोच रहा हूं, क्या होगा सद्दाम और सुधीर का?



Posted Date: 04 Jan 2019

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मैंने जब उससे उसका नाम पूछा तो उसने होठों को गोल करके, धुंआ छोड़ते हुए कहा, "सद्दाम"। 12 साल के सद्दाम के एक हाथ में सिगरेट और गले में हरा मफलर था। सद्दाम ने सिगरेट अपने साथ के दूसरे लड़के को पकड़ाई या कहें उस 10 साल के लड़के ने मुंह से छीन ली और आगे भाग गया।

सद्दाम बताता है कि वो स्कूल नहीं जाता और उसके मां-बाप को इसकी कोई परवाह नहीं है। वो बस पूरा दिन टहलता है। उसके साथ 3-4 लड़के और थे। सभी उससे छोटे और सबसे छोटा 6 साल का। सद्दाम को सिगरेट पीता देख जो चौंक आई थी उससे उभरा ही था कि 6 साल के लड़के ने भी सिगरेट पकड़ कर स्तब्ध कर दिया।

सद्दाम और उन लड़कों में चोरी भाव था इसलिए किसी ने कुछ नहीं बताया। किसी राह चलते लड़के को देखकर मुझे इतनी परवाह क्यों हो रही है? शायद इसीलिए क्योंकि मैं मतलबी हूं, 12 साल का सद्दाम मुश्किल में है। इत्तेफाक से उसकी उम्र सुनते ही मुझे उसमें अपना छोटा भाई दिखा। अगर आपका भी कोई छोटा भाई या बेटा है तो उसको सिगरेट लहराते हुए सद्दाम की जगह रख कर देखिए, आपको भी फर्क पड़ेगा।

इससे भी भयावह हाल सुधीर का था। लाखों की फीस देने वाले कॉलेज या चंद सैलरी देने वाले चारदीवारी संस्थान आपको वो कभी नहीं सीखा पाएंगे जो पैरों से रास्ता नापती ये कहानियां सिखा जाती हैं। शहरों में हरे-पीले रंग की टैक्सियों में सिर्फ 8 सवारी नहीं बैठती, बैठती हैं 8 कहानियां, 8 किरदार, 8 समस्याएं और 8 मानसिकताएं। उस रोज उस अदद एक टैक्सी ने उन आठों लोगों में एक सुधीर भी था। वो कोई पैसे देकर बैठने वाली सवारियों में से नहीं था। टैक्सी चली तो वो दौड़ कर आया और टैक्सी की सीढ़ियों पर ड्राइवर से छिपकर नीचे बैठ गया। उसके एक हाथ में एक पॉलीथिन और एक हाथ में 20-25 रुपए का एक व्हाइटनर था।

सुधीर ने बताया कि वो 8 साल का है। शहर के एक बड़े चौराहे पर आने वाली टैक्सियों में सवारियां बिठाता है। बदले में उसे टैक्सी वाले 5 रुपए दे देते हैं। जैसे ही मतलब भर के पैसे हो जाते हैं वो व्हाइटनर खरीद लेता है। दिन में औसतन 3-4। उसने मुँह से व्हाइटनर का कैप खोला और फेंक दिया। पॉलीथिन में लिक्विड उड़ेला और खाली बॉडी हवा में उड़ा दी और मुंह मे पॉलीथिन लगा कर उसे सूंघने लगा। दो दिन तक सुधीर के बारे में सोचता रहा। दिल सुधीर के बर्बाद भविष्य के घाव से उभरा ही था कि अगले दिन फिर सुधीर ही दिखा। इस बार उसके साथ 3-4 लड़के और थे। दुःख हुआ देखकर कि सबके हाथ में एक पॉलीथिन थी....

इनकी रगों में इस नशे को किसने घोला? क्या इन्हें इनके नुकसान पता हैं? कितने सालों से ये इस व्यसन में है? कहां और कैसे इस काले अध्याय की शुरुआत हुई? इन सब सवालों से ज़्यादा डरा देता है ये सवाल कि आने वाले 5 या 10 सालों में ये लड़के कहाँ और किस हाल में होंगे?


BY : Yogesh