विशेष - भैया दूज विशेष : जानिए क्या है शुभ मुहूर्त और इस त्योहार को मनाने का कारण

भैया दूज विशेष : जानिए क्या है शुभ मुहूर्त और इस त्योहार को मनाने का कारण



Posted Date: 09 Nov 2018

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लखनऊ। दिवाली का उत्सव पूरे भारत में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। लगभग हर धर्म को मानने वाले लोग इस त्योहार का आनंद लेते हैं। दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाने वाला भैया दूज का त्योहार हिंदू धर्म में बेहद खास महत्व रखता है। पूरे देश में रक्षा बंधन के बाद भाई-बहन के प्रेम विश्वास व स्नेह के रुप में इस त्योहार को मनाया जाता है। 2018 में भैया दूज का त्योहार 9 नवंबर को है। इस दिन का शुभ मुहूर्त दोपहर में 1:09 से 03:17 बजे तक है।

ये है भैया दूज को मनाने के पीछे की कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान सूर्यदेव और उनकी पत्नी छाया से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना और यमराज में बहुत स्नेह था| मृत्यु के देवता यमराज सदैव प्राण हरने में ही व्यस्त रहते थे| उधर यमुना भाई यमराज को निरंतर अपने घर आने का निमंत्रण देती रहती थी| एक दिन कार्तिक शुक्ल की द्वितीय तिथि पर यमुना ने यमराज को अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर दिया|

चूंकि यमराज मृत्युदेव है इसलिए वे इस बात से भली भांति अवगत थे कि उन्हें कोई कभी भी अपने घर आने का निमंत्रण नहीं देगा| और यमुना इतने स्नेह, सद्भावना से उन्हें बुला रही है| यमराज ने सोचा कि उन्हें अपनी बहन के प्रति यह धर्म निभाना ही है| यमराज को अपने घर आते देख यमुना अत्यंत प्रसन्न हुई| उन्होंने स्नानादि कर पूजन किया और भाई के समक्ष व्यंजन परोस दिए|

यमुना के इस आतिथ्य सत्कार से प्रसन्न होकर यमराज ने अपनी बहन से वर मांगने के लिए कहा| यमुना ने यमराज से कहा कि वह प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि में उनके घर आया करे| साथ ही उन्होंने यह कहा कि उनकी तरह कोई भी बहन इस दिन यदि अपने भाई का विधिपूर्वक तिलक करे, तो उसे यमराज यानि मृत्यु का भय ना हो| यमराज ने मुस्कराते हुए तथास्तु कहा और यमुना को वरदान देकर यमलोक लौट आये| तब से लेकर आजतक हिन्दू धर्म में यह परंपरा चली आ रही है| इसलिए भैया दूज के पर्व पर मृत्युदेव यमराज और उनकी बहन यमुना जी की पूजा विशेषरूप से की जाती है|

इस तरह करें बहनें अपने भाईयों को तिलक

इस दिन अपने भाईयों को तिलक करने के लिए बहनें प्रातःकाल में स्नानादि से निवृत होकर अपने भाइयों को एक आसन पर बिठाएं| तत्पश्चात दीप-धूप से आरती उतारकर रोली एवं अक्षत से भाइयों का तिलक करें और उन्हें अपने हाथ से भोजन कराएं। ऐसा करने से भाई की आयु में वृद्धि होती है और उनके जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं| इस दिन बहन के घर भोज करने का विशेष महत्व माना जाता है|


BY : INDRESH YADAV


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