राष्ट्रीय - MP Election घमासान : बीजेपी की बढ़ीं मुश्किलें, पूर्व सीएम ने की बगावत, कहा- निर्दलीय लड़ूंगा

MP Election घमासान : बीजेपी की बढ़ीं मुश्किलें, पूर्व सीएम ने की बगावत, कहा- निर्दलीय लड़ूंगा



Posted Date: 05 Nov 2018

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भोपाल। मध्य प्रदेश में इन दिनों चुनावी घमासान जोरों पर हैं। टिकट बंटवारे को लेकर बीजेपी समेत कांग्रेस में प्रत्याशियों के बीच खींचतान शुरु हो गई है। एमपी चुनाव में पूर्व सीएम बाबूलाल गौर ने बगावत करते हुए बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बाबूलाल अपनी पुरानी सीट गोविंदपुरा से ही चुनाव लड़ना चाहते हैं।

हालांकि बीजेपी की तरफ से गोविंदपुरा सीट पर अभी तक किसी भी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है। लेकिन पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची में गोविंदपुरा का नाम ही नहीं रखा है। इस बात को लेकर बाबूलाल ने बीजेपी को पार्टी छोड़ने की धमकी दी है। उनका कहना है कि अगर पार्टी की तरफ से उन्हें गोविंदपुरा से टिकट नहीं दिया गया तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।

पहले सीएम और मंत्री पद छीना अब टिकट भी नहीं दे रहे

खबरों के मुताबिक, मामले पर बयान देते हए बाबूलाल गौर ने कहा कि पहले पार्टी ने मेरा सीएम पद छीना, फिर मंत्री पद और अब टिकट भी नहीं दे रहे हैं। यह तो मेरा अपमान है। यदि बीजेपी ने टिकट नहीं दिया तो बहू कृष्णा गौर गोविंदपुर से निर्दलीय लड़ेंगी और मैं हुजूर से निर्दलीय लड़ने का विचार कर रहा हूं।

वहीं, इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि टिकट बंटवारे को लेकर मचे घमासान के बीच कांग्रेस नेता कमलनाथ ने बाबूलाल गौर से फोन पर बात की और उन्हें कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। हालांकि, इसकी अब तक पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए छोड़ना पड़ा था बाबूलाल को मंत्री पद, 10 बार रह चुके हैं विधायक

बता दें कि उन्हें 2016 में बाबूलाल गौर को मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। दरअसल, भाजपा ने 70 की उम्र पार के नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी न देना तय किया था। इसके बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। तभी से गौर अघोषित रूप से पार्टी के खिलाफ हो गए। वे कई बार शिवराज सरकार की नीतियों की आलोचना कर चुके हैं।

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बाबूलाल गौर भोपाल की गोविंदपुरा सीट से 10 बार से विधायक हैं। 89 साल के बाबूलाल गौर ने पहला चुनाव 1974 में भोपाल दक्षिण सीट से लड़ा था। उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1977 में गोविंदपुरा सीट को चुना और जीत दर्ज की। तब से वे इस सीट पर लगातार 10 बार से जीतते आ रहे हैं। 23 अगस्त 2004 से 29 नवंबर 2005 तक गौर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे।

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BY : Indresh yadav


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