राष्ट्रीय - संतों का ‘धर्मादेश’- यदि करनी है... मंदिर-मठ, संस्कृति और बेटियों की हिफाजत, करें भाजपा को वोट

संतों का ‘धर्मादेश’- यदि करनी है... मंदिर-मठ, संस्कृति और बेटियों की हिफाजत, करें भाजपा को वोट



Posted Date: 05 Nov 2018

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नई दिल्ली। अगले साल यानी साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों पर सभी की नज़रें जमी हुई हैं। सियासी दल हों या आम जन सभी उस पल के इंतजार में हैं, जब एक बार फिर देश के सत्ता की बागड़ोर किसी सियासी महारथी के हाथ में जाएगी। मौजूदा वक्त में देश के हर कोने में  भाजपा का परचम लहरा रहा है। इस बात से कई लोग जितना खुश हैं, वहीं बहुत से ऐसे भी है, जो सत्ता में परिवर्तन की आकांक्षाएं लगाये बैठें हैं। अब नतीजा क्या होगा ये तो वक्त ही बताएगा। लेकिन उस सियासी घमासान के लिए आज से ही तैयारियां जोरों पर हैं।

जहां एक ओर भाजपा पूरे दमखम और लाव-ए-लश्कर के साथ दोबारा जीत की टाल ठोंक रही है। वहीं विपक्ष के अरमानों पर पानी फेरने का बीड़ा अब संत समाज ने भी उठा लिया है।

आलम यह है कि संत समाज एक अभियान के तहत भाजपा समर्थकों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार को दोबारा लाने का आह्वान कर रहा है।

इतना ही नहीं उनका तो यह भी कहना है कि यदि मंदिर-मठ बचाना है, हिंदुत्व के अस्तित्व को जिताना है और घर की बहू-बेटियों की रक्षा करनी है तो मोदी सरकार को जिताना ही होगा।

इसी के साथ संतों ने तीर्थयात्राओं को बढ़ावा देने के लिए ‘तीर्थाटन मंत्रालय’ बनाए जाने की मांग की। साधुओं ने कहा कि यह भी सुनिश्चित हो कि तीर्थाटन वाले स्थान टूरिस्ट प्लेस में न तब्दील हों। गायों की हिफाजत के लिए ‘गौ मंत्रालय’ के निर्माण की भी मांग की गई।

इससे पहले इसी संत समाज ने रविवार को कहा था कि केंद्र सरकार को अयोध्या में राम मंदिर बनवाने के लिए ऑर्डिनेंस या कानून का सहारा लेना चाहिए।

खबरों के मुताबिक़ अखिल भारत संत समिति के साधुओं ने अपने अनुयायियों से अपील की है कि वे सुनिश्चित करें, नरेंद्र मोदी 2019 में सत्ता में वापसी करें।

उन्होंने कहा कि लोगों को उनको वोट करना चाहिए, जिनकी ‘गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गोविंद’ में आस्था हो।

साथ ही संत समिति ने अयोध्या, नागपुर और बेंगलुरु में 25 नवंबर को तीन और ‘धर्मसभाएं’ आयोजित किए जाने का ऐलान किया है।

इसके अलावा, 9 दिसंबर को दिल्ली में भी बड़ी तादाद में साधु इकट्ठे होंगे। उनके मुताबिक, 18 दिसंबर के बाद से पूरे देश में ऐसी 500 से ज्यादा बैठकें होंगी।

विभिन्न मुद्दों पर संतों के ‘धर्मादेश’ को पढ़ते हुए समिति के प्रमुख हंसदेवाचार्य ने कहा, ‘अगर जीवित रहना है, मठ-मंदिर बचाना है, बहन-बेटी बचानी है, संस्कृति और संस्कार बचाना है तो इस सरकार को दोबारा से लाना है।’

संतों को इस सरकार पर भरोसा है कि वही उस इच्छा को पूरी कर सकती है, जो कोई दूसरी सरकार नहीं कर सकती।

संतों के मुताबिक, ‘सिर्फ यही सरकार हमारी उम्मीदें पूरी कर सकती है। अपना देश भी बचाओ, अपनी संस्कृति भी बचाओ और फिर से इस भारत के अंदर इसी सरकार को 2019 में वापस लाओ, लाओ… जय श्री राम।’

हंसदेवाचार्य ने कहा कि राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ होने में देरी होने की वजह से संत आहत हैं। उन्होंने कहा, ‘लेकिन हम केंद्र सरकार के देश, धर्म, संस्कृति, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े कामों से संतुष्ट हैं।’

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वहीं पुणे के संत गोविंद गिरी ने कहा कि कुछ ताकतें सरकार को ‘अस्थिर’ करने की कोशिश कर रही है और मध्य प्रदेश में सरकार के खिलाफ एक ‘साजिश’ रची गई।

उन्होंने कहा, ‘भविष्य की योजना बनाते वक्त हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि किसी भी हालत में हमारी केंद्र सरकार अस्थिर नहीं होनी चाहिए।’

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BY : Ankit Rastogi


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