राजनीति - PM मोदी का सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक! सवर्ण आरक्षण के बाद अब हर एक के खातें में आएगी ये बड़ी रकम

PM मोदी का सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक! सवर्ण आरक्षण के बाद अब हर एक के खातें में आएगी ये बड़ी रकम



Posted Date: 11 Jan 2019

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नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी रूठों को मनाने का पूरा मन बना लिया है। हाल ही में मोदी सरकार ने सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण बिल पास कराया। अब खबर आ रही है कि किसानों, बेरोजगारों और गरीबों के लिए भी वे अपना खजाना खोलने का मन बना चुके हैं। इन नई सौगातों का ऐलान मकर संक्रांति के ठीक एक दिन बाद किये जाने के आसार जताए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि 16 जनवरी को खुलने वाले खजाने से सभी को एक मुश्त 30 हजार रुपये की मदद देने का ऐलान किया जा सकता है।

खबरों के मुताबिक़ किसानों, बेरोजगारों और गरीबों के खाते में एक मुश्त 30 हजार रुपये की मदद दी जाएगी। इस मदद को यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम (यूबीआई) के तहत दिया जाएगा।

बता दें मोदी सरकार के प्लान के मुताबिक गरीब किसानों व बेरोजगारों को प्रत्येक महीना 2500 हजार रुपया दिया जाएगा। यह राशि हर महीने के बजाए एकमुश्त दी जाएगी। किसान के परिवार को भी मदद पहुंचाई जा सकती है। 

राहत पैकेज में बीमा, कृषि लोन, आर्थिक मदद दी जा सकती है। स्कीम में छोटे, सीमांत और बटाईदारों या किराया पर किसानी करने वाले किसानों को फायदा देने पर जोर है।

दरअसल किसानों को राहत देने के लिए मोदी सरकार ने जिन दो मॉडल का अध्ययन किया है, उसमें ओडिशा का मॉडल ज्यादा दमदार है। ओडिशा के कालिया मॉडल में किसानों को 5 क्रॉप सीजन में 25000 रुपये दिए जाते हैं। हालांकि, मोदी सरकार किसान को सालाना एक मुश्त आर्थिक मदद देने पर विचार कर रही है।

बताया जा रहा है कि संसद में वर्ष 2017-17 के लिए पेश आर्थिक सर्वेक्षण में इसका जिक्र किया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया था कि यूबीआई एक बेहद शक्तिशाली विचार है और यदि यह समय इसे लागू करने के लिए परिपक्व नहीं है तो इस पर गंभीर चर्चा तो हो ही सकती है।

इसमें कहा गया है कि सिर्फ केन्द्र सरकार की ही करीब 950 योजनाएं चलती हैं जिस पर सकल घरेलू उत्पाद की करीब पांच फीसदी राशि खर्च होती है। इसके अलावा मध्यम वर्ग को खाद्य, रसोई गैस और उर्वरक पर सकल घरेलू उत्पाद की तीन फीसदी राशि खर्च होती है। यह राशि लक्ष्य समूह तक पहुंच सके, इसमें यूबीआई सहायक हो सकता है।

वहीं स्कीम के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि इसमें कहा गया है कि हर आंख से आंसू पोछने का महात्मा गांधी का उद्देश्य पूरा करने में यूबीआई सफल हो सकता है। इस योजना में राशि का हस्तांतरण सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में होगा, इसलिए लाल फीताशाही या ब्यूरोक्रेसी से इसे निजात मिल सकती है।

बता दें यूबीआई के लिए जन धन, आधार और मोबाइल -जैम- में से दो चीजें तो पूरी तरह से कार्यशील हैं। सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया था कि इसे लागू करने से गरीबी में आधा फीसदी की कमी हो सकती है और इसे लागू करने पर सकल घरेलू उत्पाद का महज चार से फीसदी राशि ही लगेगी।

जानकारी के लिए बता दें कि साइप्रस, फ्रांस, अमेरिका के कई राज्य, ब्राजील, कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, आयरलैंड, लग्जमबर्ग जैस देशों में इस तरह की व्यवस्था पहले से लागू है।

हालांकि इस स्कीम के लागू होने के बाद लोगों को राशन और एलपीजी सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा नहीं मिलेगा। इसमें वो किसान भी शामिल होंगे, जो दूसरों के यहां मजदूरी करते हैं। 

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नए प्रस्ताव के मुताबिक किसानों को खेती के लिए अब सरकार सीधे खाते में पैसे देगी। खास बात यह है कि जिन किसानों के पास अपनी जमीन नहीं है, सरकार उन्हें भी इस स्कीम में शामिल करके फायदा पहुंचाएगी।

इस मामले में जानकारों की माने तो उनका कहना है कि केंद्र सरकार की अब सीधे नजर मई 2019 में होने वाले आम चुनावों पर है। इसलिए वो बजट में इस योजना की घोषणा करना चाहती है, ताकि एनडीए एक बार फिर से भारी बहुमत से जीत सकें। मोदी सरकार इस स्कीम पर दो साल से काम कर रही है।

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BY : Ankit Rastogi