विशेष - जॉन मथाई : देश के पहले परिवहन मंत्री के साथ-साथ शिक्षाविद, अर्थशास्त्री और न्यायविद भी थे

जॉन मथाई : देश के पहले परिवहन मंत्री के साथ-साथ शिक्षाविद, अर्थशास्त्री और न्यायविद भी थे



Posted Date: 10 Jan 2019

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10 जनवरी 1886 में जन्में डॉ. जॉन मथाई देश के मशहूर शिक्षाविद, अर्थशास्त्री एवं न्यायविद् थे। केरल के त्रिवेंद्रम नगर में जन्में मथाई क्रिश्चियन परिवार से थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा त्रिवेंद्रम में ही हुई। इसके उपरांत उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की। बी.ए. तथा बी.एल की डिग्रियां प्राप्त कर वे लंदन गए और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से बी लिट् की डिग्री प्राप्त की। फिर उन्होंने डी एस-सी की डिग्री लंदन विश्वविद्यालय से प्राप्त की।

1910 ई से 1918 ई तक वे मद्रास हाईकोर्ट के वकील रहे। 1920 ई से 1925 ई तक मद्रास के प्रेज़ीडेंसी कालेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे। 1922 ई से 1925 ई तक वे मद्रास लेजिस्लेटिव कौंसिल के तथा 1925 से 1931 तक इंडियन टैरिफ बोर्ड के सदस्य रहे। 1935 में वे कमर्शियल इंटेलिजेंस तथा स्टैटिस्टिक्स के महा निदेशक नियुक्त हुए। 10 जनवरी 1940 ई को उन्हें अवकाश प्राप्त हुए।

1944 ई से 1946 ई तक टाटा संस लिमिटेड के निदेशक रहने के बाद केंद्र सरकार में परिवहन मंत्री बने। इसके बाद 1950 तक उन्होंने वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला और फिर वहां से त्यागपत्र देकर वे दोबारा टाटा संस लिमिटेड के निदेशक नियुक्त हो गए। जुलाई 1955 ई से सितंबर 1956 ई तक वे भारतीय स्टेट बैंक के बोर्ड ऑव डॉयरेक्टर्स के अध्यक्ष रहे। इसी बीच वे मुंबई विश्वविद्यालय के उपकुलपति नियुक्त हुए और फिर 1958 से 1959 तक केरल विश्वविद्यालय के उपकुलपति रहे।

1959 ई में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मविभूषण की उपाधि से विभूषित किया। डॉ. मथाई ने तीन विश्व प्रसिद्ध पुस्तकें भी लिखी हैं- ‘विलेज गवर्नमेंट इन ब्रिटिश इंडिया’, ‘एग्रीकल्चरल कोऑपरेशन इन इंडिया’, ‘एक्साइज़ एंड लिकर कंट्रोल।’

1959 में उनके निधन के साथ देश ने एक काबिल बौद्धिक शिक्षाविद एवं विद्वान अर्थशास्त्री को खो दिया। उनका स्थान शायद ही कोई प्राप्त कर सके।


BY : Saheefah Khan