लाइफस्टाइल - खान-पान की इन आदतों में स्मार्ट बदलाव लाकर आप बन सकते हैं स्मार्ट और फिट

खान-पान की इन आदतों में स्मार्ट बदलाव लाकर आप बन सकते हैं स्मार्ट और फिट



Posted Date: 05 Jan 2019

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आज के दौर की सबसे बड़ी समस्या है लगातार नए फूड प्रोडक्ट्स अऔर दिलचस्प इनोवेशंस की बढ़ती लिस्ट, भ्रमित और लगातार बदलतती न्यट्रिशन रिसर्च, अपने आराम और सुविधा को लेकर जबरदस्त बदलाव के बीच अपनी सेहत को बचाना। इस लिए खराब खाने में सही चीज़ों को चुनने के लिए एक खास कौशल की ज़रुरत होती है।

यहां खाने की चीज़ो के चुनाव के लिए कुछ कौशल के बारे में बताया जा रहा है जिसके ज़रिए साल 2019 में आप फिट और हेल्दी रह सकते हैं।

सभी शुगर एक तरीके से नहीं बनाए जाते हैं। अमेरिका में कंपनियों को फूड लेबल पर एडेड और नैचुरल रुप से मौजूद शुगर के बीच अंतर करने के लिए कहा गया है। यह एक अच्छी बात है लेकिन इनके बीच अंतर जानना ज़रुरी भी है क्योंकि फूड में मौजूद नैचुरल शुगर का हिस्सा उतना हानिकारक नहीं होता है।

मैकेनिकल और केमिकल प्रोसेसिंग के बीच अंतर करना सीखना महत्वपूर्ण है। समस्या मैकेनिकल प्रोसेसिंग नहीं है, बल्कि केमिकल प्रोसेसिंग है, जिसमें आर्टिफिशियल केमिकल के प्रयोग के ज़रिए स्वाद में सुधार, लंबे समय तक रखने योग्य बनाने, दुर्गंध दूर करना या गंधहीन बनाना, दूसरे तत्वों की कमी को पूरा करना, ब्लीचिंग और कॉस्ट कटिंग शामिल है।

हम हर समय ओमेगा 3 के महत्व के बार में पढ़ते हैं क्योंकि ये बहुत मूल्यवान पोषक तत्व है लेकिन ओमेगा 3 के बारे में सबकुछ जानने के अलावा इसके समकक्ष ओमेगा 6 के बारे में जानना भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि दुर्भाग्य से हम सभी अनजाने में इसका बहुत अधिक मात्रा मे उपभोग कर रहे हैं। यह तेज़ी से स्पष्ट हो रहा है कि ह्रदय रोग, हाइपरटेंशन, डायबिटीज़, मोटापा, जल्दी बूढ़ा होना और यहां तक कि कैंसर के कुछ रुपों का एक बड़ा कारण ओमेगा-6 और ओमेगा-3 फैटी एसिड को सही अनुपात में नहीं लेना है।

इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि ओमेगा 3 के सेवन को न केवल बढ़ाया जाए, बल्कि हमारे भोजन में ओमेगा-6 फैट की मात्रा को भी कम किया जाए। ओमेगा 3 के सोर्स (वसायुक्त मछली, फ्लैक्स सीड्स, अखरोट) को बढ़ावा देने और वनस्पति तेलों के कम उपयोग, हाइड्रोजनीकृत या आंशिक रुप से हाइड्रोजनीकृत फैट, कृत्रिम मक्खन, पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स में कटौती से ओमेगा 6 की मात्रा को कम किया जा सकता है।

हमारे शरीर को हर रोज़ केवल 500 मिलीग्राम सोडियम की आवश्यकता होती है। एक वयस्क के लिए रोज़ाना लगभग 2,400 मिलीग्राम तक सेवन भी स्वीकार्य है। फिर भी हममें से ज्यादातर अक्सर आसानी से एक दिन में लगभग 3,000-4,000 मिलीग्राम सोडियम कंज़्यूम करते हैं। यह बहुत अधिक होता है और इसका ज़्यादातर हिस्सा हमारे द्वारा खाए जाने वाले प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स में छिपा होता है। इन चीज़ो की पहचान करें और नुकसानदायक चीज़ो से दूर रहें।


BY : Saheefah Khan