विशेष - एक ऐसे कुशल राजनेता जिन्होंने दो प्रधानमंत्रियों की मौत के बाद पीएम की ज़िम्मेदारी सफलतापूर्वक निभाई

एक ऐसे कुशल राजनेता जिन्होंने दो प्रधानमंत्रियों की मौत के बाद पीएम की ज़िम्मेदारी सफलतापूर्वक निभाई



Posted Date: 06 Jan 2019

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नंदा जी के रुप में प्रसिद्ध हुए गुलज़ारी लाल नंदा ऐसे एकमात्र प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री की ज़िम्मेदारी निभायी है। देश की संवैधानिक पंरपरा के अनुसार यदि किसी प्रधानमंत्री की उसके कार्यकाल के दौरान मृत्यु हो जाती है तो जब तक नया प्रधानमंत्री चुना जाना तत्काल संभव न हो तो कार्यवाहक अथवा अंतरिम प्रधानमंत्री की नियुक्ति तब तक के लिए की जा सकती है जब तक नया प्रधानमंत्री विधिक रुप से नियुक्त नहीं कर दिया जाता।

4 जुलाई, 1898 को पाकिस्तान के सियालकोट मे जन्में गुलज़ारीलाल नंदा की प्राथमिक शिक्षा सियालकोट में ही संपन्न हुई। इसके बाद लाहौर के ‘फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज’ तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। कला संकाय में स्नातोकोत्तर एवं कानून की स्नातक उपाधि प्राप्त की।

नंदाजी का जीवन शुरु से ही राष्ट्र के प्रति समर्पित था। 1921 में उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया। वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। मुंबई के नेशनल कॉलेज में उन्होंने अर्थशास्त्र के व्याख्याता के रुप में अपनी सेवाएं प्रदान कीं। अहमदाबाद की टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री में वह लेबर एसोसिएशन के सचिव भी रहे और 1922 से 1946 तक का लम्बा समय उन्होंने इस पद पर गुज़ारा।

वह श्रमिकों की समस्याओं को लेकर सदैव जागरुक रहे और उनका निदान करने का प्रयास करते रहे। 1932 में सत्याग्रह आंदोलन के दौरान और 1942 से 1944 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय उन्हें जेल भी जाना पड़ा। वह मुंबई की विधानसभा में 1937 से 1939 तक और 1947 से 1950 तक विधायक रहे। इस दौरान उन्होंने श्रम एवं आवास मंत्रालय का कार्यभार मुंबई सरकार में रहते हुए देखा।

1947 में इंडियन नेशनलट ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना हुई और इसका श्रेय ऩंदा जी को जाता है। मुंबई सरकार में रहने के दौरान गुलज़ारीलाल नंदा की प्रतिभा को रेखाकिंत करने के बाद उन्हें कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली बुला लिया। वह 1950-1951, 1952-1953 और 1960-1963 में भारत के योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद पर रहे। ऐसे में उन्होंने कई पंचवर्षीय योजनाओं में पंडित जवाहरलाल नेहरु को काफी सहयोग दिया।

नंदाजी प्रथम पांच आम चुनावों में लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। उन्होंने प्रत्येक विभाग में समर्पित भाव से कार्य किया और जनता के बीच लोकप्रिय बने रहे। वह एक धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी समाज की कल्पना करते थे। उन्होंने भारत सेवक समाज नाम का एक संगठन बनाया था जिससे वह अजीवन जुड़े रहे।

नंदाजी ने मंत्रिमंडल में वरिष्ठतम सहयोगी होने के कारण दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री का दायित्व संभाला। उनका प्रथम कार्यकाल 27 मई, 1964 से 9 जून 1964 तक रहा। जब पंडित जवाहरलाल नेहरु का निधन हुआ। दूसरा कार्यकाल 11 जनवरी 1966 से 24 जनवरी 1966 तक रहा जब लाल बहादुर शास्त्री का ताशकंद में देहांत हुआ।

15 जनवरी, 1998 में 100 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। उन्हें 1997 में देश का दूसरा सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ दिया गया। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं जिसमें ‘सम आस्पेक्ट्स ऑफ खादी’, अप्रोच टू द सेकंड फाइव इयर प्लान, गुरु तेगबहादुर, संत एंड सेवियर हिस्ट्री ऑफ एडजस्टमेंट इन द अहमदाबाद टेक्सटाइल्स प्रसिद्ध है।


BY : Saheefah Khan