राष्ट्रीय - लोकसभा और राज्यसभा की कसौटी पार फिर भी सवर्ण आरक्षण पर फंसा पेंच, SC में असंवैधानिक...

लोकसभा और राज्यसभा की कसौटी पार फिर भी सवर्ण आरक्षण पर फंसा पेंच, SC में असंवैधानिक...



Posted Date: 10 Jan 2019

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नई दिल्ली। हाल ही में लोकसभा और राज्यसभा की कसौटी को पार करने के बावजूद सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण मामले में पेंच फास्ता हुआ दिखाई दे रहा है। कारण है सप्रीम कोर्ट। दरअसल एक एनजीओ ने इस बिल को असंवैधानिक करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि आर्थिक रूप से आरक्षण दिया जाना गैर संवैधानिक है। इसलिए इस बिल को एक सिरे से खारिज किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि इस बिल के पास होते ही अभी तक जिन जातियों को आरक्षण नहीं मिलता था, वह इस आरक्षण की श्रेणी में आ गए हैं। हालांकि, उन्हें आर्थिक आधार पर सिर्फ 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा।

सरकार का दावा है कि इस आरक्षण से अभी तक SC/ST, OBC को जो 49।5 फीसदी आरक्षण मिलता है उसपर कोई असर नहीं पड़ेगा।

खबरों के मुताबिक़ यूथ फॉर इक्वालिटी (youth for equality) नाम के एनजीओ ने याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तय की गई है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से आरक्षण देना गलत है और ये सिर्फ सामान्य श्रेणी के लोगों को नहीं दिया जा सकता है।

याचिका में कहा गया है कि गैर-अनुदान प्राप्त संस्थाओं को आरक्षण की श्रेणी में रखना गलत है। याचिका में अपील की गई है कि इस बिल को गैर संवैधानिक घोषित किया जाए। इसमें कहा गया है कि ये फैसला वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

बता दें कि बुधवार को ही 10 घंटे की लंबी बहस के बाद राज्यसभा में संशोधित बिल पास हुआ है। ये बिल लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है। अब इस बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा।

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गौरतलब है कि कई राजनीतिक दलों ने इस बिल को लाने की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा है। हालांकि, अधिकतर विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल के पक्ष में ही वोट दिया है।

आपको बता दें कि यूथ फॉर इक्वॉलिटी एक संस्था है जिसे कई स्टूडेंट और प्रोफेशनल मिलकर चलाते हैं। इससे पहले भी ये NGO शिक्षा में सुधार, राजनीति में सुधार जैसे कई मसलों पर कैंपेन चला चुकी है।

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BY : Ankit Rastogi