राजनीति - आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल के नक्शेकदम पर बढ़ी छत्तीसगढ़ सरकार, CBI को किया बैन

आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल के नक्शेकदम पर बढ़ी छत्तीसगढ़ सरकार, CBI को किया बैन



Posted Date: 11 Jan 2019

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नई दिल्ली। आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल के नक्शेकदम पर चलते हुए अब छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को बैन कर दिया है। राज्य के द्वारा उठाए गए इस बड़े कदम को मई में होने वाले आम चुनावों के मद्देनज़र उठाया गया कदम बताया जा रहा है। बता दें बैन की स्थिति में सीबीआई किसी भी तरह के मामले में तब तक दखलंदाजी नहीं कर सकती जब तक केंद्र के साथ राज्य सरकार की सहमती शामिल ना हो।

वहीं किसी मामले की गंभीरता को देखते हुए यदि जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट सीबीआई को ग्रीन सिग्नल दे देती है तो राज्य द्वारा लगाया गया बैन त्वरित रूप से खारिज हो जाएगा।

खबरों के मुताबिक़ गृह विभाग ने गुरुवार को केंद्रीय कार्मिक, जनशिकायत और पेंशन मामले तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि राज्य सरकार साल 2001 में केंद्र को दी गई उस सहमति को वापस लेती है, जिसके तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सीबीआई को छत्तीसगढ़ में कोई भी मामलों की जांच के लिए अधिकृत करने की अधिसूचना जारी की गई थी।

बता दें इससे पहले आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने-अपने राज्य में सीबीआई के प्रवेश पर रोक लगा दी थी।

दरअसल राज्य में पिछले 18 सालों के दौरान सीबीआई की ओर से आधा दर्जन मामलों की जांच की जा चुकी है। इनमें रामावतार जग्गी हत्याकांड, बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक और छुरा के उमेश राजपूत की हत्या, एसईसीएल कोल घोटाला, आईएएस बीएल अग्रवाल रिश्वत कांड, भिलाई का मैगनीज कांड और पूर्व मंत्री राजेश मूणत की कथित अश्लील सीडी कांड की जांच शामिल है।

बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से ऐन पहले राज्य सरकार का बड़ा कदम माना जा सकता है। प्रदेश की एजेंसियों को जांच का जिम्मा दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सरकार विशेष जांच दल गठित कर देगी, जो अफसरों के साथ न्यायिक अधिकारियों के नेतृत्व में बनाए जा सकते हैं।

इस कदम के बाद सीबीआई गठन के कानून में ही राज्यों से सहमति लेने का प्रावधान है। दरअसल, सीबीआई दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम-1946 के जरिए बनी संस्था है। अधिनियम की धारा-5 में देश के सभी क्षेत्रों में सीबीआई को जांच की शक्तियां दी गई हैं। पर धारा-6 में कहा गया है कि राज्य सरकार की सहमति के बिना सीबीआई उस राज्य के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकती।

इससे पहले आंध्र और प. बंगाल सरकार ने धारा-6 का ही इस्तेमाल करते हुए सहमति वापस ले ली थी। सीबीआई छत्तीगढ़ में केंद्रीय अधिकारियों, सरकारी उपक्रमों और निजी व्यक्तियों की जांच सीधे नहीं कर सकेगी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी प्रदेश में कोई कदम नहीं उठा सकेगी।

धारा-6 के अनुसार सीबीआई खुद मामले की जांच शुरू नहीं कर सकती। राज्य और केंद्र सरकार के कहने या हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही जांच कर सकती है। ऐसे में अगर कोई राज्य सीबीआई को बैन करता है तो कोर्ट के आदेश के बाद राज्य का आदेश रद्द हो जाएगा।

जानकारों का मानना है कि राज्य के इस कदम को उठाने के पीछे का कारण यह है कि आम चुनाव सिर पर हैं। ऐसे में राज्य की कांग्रेस सरकार यह नहीं चाहती की केंद्र जानबूझ कर राज्य में स्वतंत्र रूप से किसी मामले को उठाते हुए सीबीआई जांच बिठाए। यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा असर आगामी लोकसभा चुनावों पर पडेगा।

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वहीं हाल ही में सामने आये सीबीआई विवाद और बाद में कोर्ट द्वारा जबरन छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की पद बहाली के बाद केंद्र द्वारा जो कदम उठाये गए वो विचारणीय हैं।

बता दें आलोक वर्मा के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही सवाल उठाया था कि आखिर केंद्र सीबीआई निदेशक को पद से हटाने के लिए इतनी जल्दबाजी में क्यों हैं?

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BY : Ankit Rastogi