राष्ट्रीय - लोकसभा चुनाव से पहले एक और साथी ने छोड़ा BJP का साथ, AGP ने तोड़ा गठबंधन

लोकसभा चुनाव से पहले एक और साथी ने छोड़ा BJP का साथ, AGP ने तोड़ा गठबंधन



Posted Date: 07 Jan 2019

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नई दिल्ली। मोदी सरकार द्वारा नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 को आगे बढ़ाने पर असम गण परिषद (एजीपी) ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से अपना गठबंधन तोड़ लिया। पार्टी अध्यक्ष अतुल बोरा ने इस बाबत सोमवार को घोषणा की। गृह मंत्री राजनाथ सिंह से दिल्ली में मुलाकात के बाद बीजेपी से गठबंधन तोड़ने का एलान किया।

बता दें कि एजीपी प्रमुख अतुल बोरा असम में लागू नागरिकता संसोधन विधेयक (एनआरसी) को लेकर बीजेपी के नेतृत्व वाली मोदी सरकार से नाराज चल रहे थे। दिलचस्प बात ये है कि एजीपी ने यह कदम पीएम नरेंद्र मोदी के असम में दिए उस बयान के ठीक एक दिन बाद उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार प्रस्तावित नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 को संसद में मंजूरी दिलाने के लिए काम कर रही है और इसमें भारत के एक भी नागरिक को छोड़ा नहीं जाएगा।

जिस विधेयक को लेकर असम गण परिषद ने एनडीए उस विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान है।

हालांकि एजीपी के गठबंधन तोड़ने के बाद बीजेपी असम में ज्यादा प्रभावित नहीं होगी। असम में विधानसभा की कुल 126 सीटें हैं। असम विधानसभा चुनाव 2016 में इनमें से असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट समेत एनडीए के पास कुल 86 सीटें थी। 2016 विधानसभा चुनाव में अकेले बीजेपी ने 60 सीटों पर जीत हासिल की थीं। जबकि असम गण परिषद के पास 14 सीटें और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के पास 12 सीटें हैं। इसलिए एजीपी के गठबंधन तोड़ने के बाद भी सरकार को कोई खतरा नहीं है। अगर आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखा जाए तो इससे असम में कुछ हद तक नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।

वहीं इस ऐलान के साथ अब एजीपी भी उन महत्वपूर्ण सहयोगियों की सूची में शामिल हो गई है, जिसने बीजेपी की नीति और वैचारिक निर्णयों के चलते गठबंधन से दूरी बनाई हो। चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी ने 2018 में एनडीए का साथ छोड़ दिया था और उपेंद्र खुशवाहा की आरएलएसपी हाल ही में एनडीए के साथ गठबंधन तोड़ने के लिए खबरों में थी।

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BY : ANKIT SINGH