राष्ट्रीय - 7 नई राजनीतिक पार्टियों ने मारी एंट्री, लोकसभा 2019 के लिए चुनाव आयोग से मांगी मान्यता

7 नई राजनीतिक पार्टियों ने मारी एंट्री, लोकसभा 2019 के लिए चुनाव आयोग से मांगी मान्यता



Posted Date: 09 Jan 2019

54
View
         

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव होने में अब 100 दिन से भी कम समय शेष है। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते जार रहे है वैसे-वैसे नई राजनीतिक पार्टियां गठित होती जा रही हैं। कयास कयास लगाये जा रहे हैं कि अप्रैल और मई में चुनाव हो सकते हैं। लगभग 2000 पार्टियों ने चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन कराया है। जिनमे से कुछ ही पार्टियों को योग ने मान्यता दी है। ऐसे में इस बार लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 7 नई पार्टियों ने चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। मंगलवार को आयोग के अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी।

रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने वाली पार्टियों में भारतीय विकास दल यूनाइटेड, लोकतांत्रिक जन स्वराज पार्टी, राष्ट्रीय आवामी यूनाइटेड पार्टी, पूर्वांचल नव निर्माण पार्टी, राष्ट्रीय जनशक्ति समाज पार्टी, सकल जनुला समाज पार्टी, स्वतंत्रता पार्टी (जन) शामिल हैं।

बता दें कि लगभग 2000 पार्टियों ने चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें से कुछ ही पार्टियों को आयोग ने मान्यता दी है। सात पार्टियों कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी , भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस को राष्ट्रीय पार्टी और 59 पार्टियों को राज्य स्तर की पार्टियों के रूप में मान्यता प्राप्त है।

वहीं चुनाव आयोग ने पिछले 20 जून से तीन अगस्त तक करीब 44 दिन में 22 नई पार्टियों का रजिस्ट्रेशन कर उनकी सूची सार्वजनिक की थी। इसमें राजस्थान की पंच और अभिनव राजस्थान पार्टी का नाम पार्टी शामिल है। आयोग की ओर से जारी सूची में उन तीन पार्टियों भारत वाहिनी पार्टी, सर्व शक्ति दल और भारतीय जन सत्ता दल का नाम भी शामिल हैं, जिन्हें इसी अवधि में रजिस्ट्रेशन मिला है। भारत वाहिनी पार्टी भाजपा छोड़ने वाले राजस्थान के दिग्गज नेता घनश्याम तिवाड़ी ने बनाई है।

बता दे कि पिछले दो दशक से राजनीतिक पार्टियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जा रही है। साल 1990 में देश में आठ राष्ट्रीय दल और कुल 17 राज्य स्तरीय दल थे। वहीं 2013 में इसकी संख्या बढ़कर छह राष्ट्रीय दलों के साथ ही 50 राज्य स्तरीय दलों की हो गई। देखा जाए तो प्रत्येक वर्ष राज्य स्तरीय दलों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई तो वहीं राष्ट्रीय स्तर के दलों की संख्या में तो कमी आई है।

Also Read-

 


BY : ANKIT SINGH