विशेष - आज पता चला क्या होता है 'लव एट फर्स्ट साइट'

आज पता चला क्या होता है 'लव एट फर्स्ट साइट'



Posted Date: 05 Jan 2019

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आज घर आते वक़्त रास्ते में आस्मा दिखी, देखते ही प्यार हो गया। उसकी मासूम सी आंखें, बेतरतीब सी ज़ुल्फ़ें, हाथों में तीन ही सही पर लाल चूड़ियां और उम्मीद से भरा एक चेहरा, सब बांध सा लेता है।

आस्मा को देखने के बाद अभी तक कुछ सोच ही नहीं पा रहा। इतना प्रभावित होने के बाद भी मैं सिर्फ नाम पूछ पाया। तस्वीर इसलिए नहीं ली क्योंकि वो असहज हो जाती। इच्छाएं सुई में पड़ने वाले धागे की तरह होती हैं जितना खींचो धागा उतना लंबा हो जाएगा। अब मन कर रहा है आस्मा के साथ बैठूं, उससे बातें करूँ, उसे अपने साथ हर पल महफूज़ रखूं।

आस्मा एक छः साल की बच्ची है जो ल्यूकोडर्मा या त्वचा पर सफ़ेद दाग नाम की स्किन डिसीज़ से पीड़ित है। इस बीमारी में दर्द नहीं होता लेकिन तकलीफ़ बहुत होती है। आज उसी तकलीफ़ में आस्मा थी। रास्ते से निकलते लोग, उंगलियां उठाकर आस्मा के बारे में बात कर रहे थे लेकिन कोई उससे बात नहीं कर रहा था। शायद उन्हें डर होगा कि कहीं आस्मा से बात करने पर ये रोग उन्हें भी न हो जाए।

वो जिस चबूतरे पर से गुज़रती उसके जाते ही उस पर पानी डाल दिया जाता और लोग उसके लिए रास्ता खाली कर देते। ये सब आस्मा को दर्द से भी ज़्यादा तकलीफ़ देता है।

हर वक़्त मोबाइल पर उंगलियां फेरने वाले जिन्होंने कभी इस रोग के बारे में पढ़ा नहीं वो इससे बचाव के सारे तरीके जानते हैं। उन्हें पता है कि एक मात्र छुआछूत से ही ये रोग होता है।

आस्मा की ये समस्या प्राकृतिक है। जब शरीर को रंग देने वाली कोशिकाएं कहीं पर मर जाती हैं तो उस अंग या उस त्वचा का रंग चला जाता है। लेकिन उसके आसपास के लोगों ने उसकी इस समस्या को महामारी घोषित कर दिया है।

अब या तो आस्मा इन लोगों से लड़ेगी या दबा दी जाएगी। या तो वो सपने पूरे करने के लिए तैयारियां करेंगी या ये लोग उसे सपने देखने से पहले ही आइना दिखा देंगे।

तुम चिंता न करो आस्मा अच्छे लोगों के साथ अच्छा ही होता है। किसी को ज़रूरत नहीं है तुमको ये बताने कि की तुम नॉर्मल हो और किसी को हक़ नहीं तुमको बीमार कहने का। तुम बस प्यारी हो बहुत प्यारी हो।

उम्मीद करता हूँ कि जब-जब तुम्हारी गली से निकलूंगा थोड़ा रुक कर चलूंगा ताकि तुम्हें देख पाऊं और मुस्कुरा सकूँ।


BY : Yogesh